विशाल हरियाणा(vishal haryana)part2

विशाल हरियाणा(vishal haryana)
Part2
राव के त्याग व श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रति संकट काल में
व सहयोग का प्रमाण

जनता सरकार का अत्यधिक पकन केवल । ।।। ।। ।
कमीशन गठन व नेहरू खानदान को पीड़ित करने तथा श्रीमती इन्दिरा गाधी-जिनें
समय पहले उनके मानसिक आदित्य अर्थ परिमेय ।।।।। ।
सराहनीय दरदाता के कारण भारत रत्न से सम्मानित किया गया था

र विदेश में विशेषकर-भारत का मान बढ़ाया उत्थानक पण राग।।।
कमान गठन प्रणाली द्वारा परेशान व दडित करना था। किन्तु भारतीय रिटी ।
विशेष परंपरा रही है कि यदि किसी व्यक्ति को या किसी सस्सीयत । । ।
चाहा-उस अवस्था में ऐसी वसीयत को–जनता ने हमेशा उभारा है।
जिस समय हरियाणा में राव के नेतृत्व वाली संयत विधायक दल सरकार राज्यात
चौ. देवी लाल व उनके सभी तत्कालीन हिमाईतियों को, जो मंत्री मंडल के सदस्य भी थे तुरन्त
परिस्थिति विवश संयुक्त विधायक दल सरकार की सम्पर्कता से आपने फारिग कर दिया। सा।
ही दोगली व्रत रखने वाले विधायकों को भी खली इट दी कि यदि वे इस सरकार की नीतियों
र का किन्ही वाहनीय दबाव से पालन करने में असमर्थ हैं या पार्टी अनुशासन की नहीं निभा
| सकते तो बोल वे उस किसान, मजदर सरकार को, जो राव के नेतत्व में कार्यभार सभाल
ई थी समर्थन देना बंद कर दे। ऐसी स्थिति में यदि राबसाहब जनसामन्य सेवा की तलना में
- माता को तरजी दत, इस भारत में केन्द्रीय सरकार से सम्पर्क स्थापित करके थोक के हिसाब न
च कांग्रेस पार्टी में सम्मिलित होकर अपनी कुर्सी कायम रख सकते थे। मगर आन-मान व
। सनी के धनी–इस लोक नेता ने उस समय श्रीमती इदिरा गांधी से अपना राज अचानक
भावना व प्ररणा निहित हार का सामन न की न ही कोई भी निम्ननर की सियाली
चाल चली, जिससे करसी बची रह सके। जैसा कि अन्य नेताओं द्वारा निजी सत्ता बचाने के
लिए इस तरहके पासे इस्तेमाल किये जाते रहे हैं। जिस समय श्रीमती इन्दिरा गांधी के
दरबार में, राज्य की महक जोरों पर थी, सत्ता के बचाव की नियत से आपने उनके कभी
निकट जान का ख्याल ही ना किया, और अगर कभी भलाकात भी की तो मज हरियाणा
हकक का लन व रावी ब्यास के पानी के वितरण सम्बधी विषयों का वन्तले ।
नियत से ।
दूसरी ओर-जब वर्ष 1978 में, जब श्रीमती इन्दिरा गांधी व उनके परिवार जनों पर
संकट के बादल छाये हुए थे, तत्कालीन जनता सरकार उनको व उनके परिवार जनों को हर
प्रकार से यातनाएं देने पर तुली हुई थी उन्हें इंतजार होता था-क कोई गौरवपूर्ण व्यक्ति
उनसे सम्पक स्थापित करे। नेहरू खानदान के साथ हो रहे जल्म की आवाज जनता तक
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पहुंचे। उस समय स्वस्थ परम्परा के प्रतीक राव ने चाहे ताकत
के समय में श्रीमती इंदिरा गांधी से अपने मुख्य मंत्री काल में कुर्सी बचाए रखने के लिए.
कोई विचार विमर्श या मंत्री ने की, किन्तु संकट के समय श्रीमती इन्दिरा गांधी की बहादरी
व हौसले की कद्र करते है, उनके त्याग व देश भक्ति की सेवाओं को सम्मान देते हुए उनके
शौर्यपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति से प्रभावित होते हए, जिस समय श्रीमती इन्दिरा गांधी राज
काज से फारिग थीं, उनके पास देने को केवल माम इन्सानी दर्द या जेल के रास्तथे ऐसे संकटा
समय में-भयभीत पूर्ण वातावरण का सामना करते हुए, राव ने महसूस किया कि श्रीमती
इन्दिरा गांधी को संकट में साथ देना- -देश की मयांदा, सम्मान,देश की

आन व किसान एवं मजदूर का साथ देना है।

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