जिसमें रुचि(jsma Ruchi), part 12

जिसमें रुचि(jsma Ruchi),
 part 12
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स्वामी आनंद जी का स्वर्गवास
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अभवा उसके ऊपर हो या फोड़ा निकल आता है। इसी कव्चा के लिए कहा।गचा है*यचणहकरोकी
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सुचारू रूप से चल रही है एक ओर तो ः ४५१ || पर ।।।।।।।।।।।।।
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जो? मूल के सभी सभी विवश हैं। ऐसे में शायद ११ । १ ।। ।।।।।।
विधिरहो बलवान् इति में पतिः - ITयरी (न् । । । । । । । । ।
पोठोहार के आचार्य मुक्ति शाम उपाध्याय को भी शोक सन्देश गला। उन्होंगे । ५। शरा
गर्ल शजर में पेजा।
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कारण लाता शिवराम मे प्रस्ताव रखा कि इस पद के लिए ० रा ज ।।।।।। ।।।।।।।।।
ब्रह्मानंद ने हर्षित होकर कहा कि यदि सुतराम मारी । रोकार छ ।
का भला क्या होगा। आज वे आम जगत् में सबसे प्रमुख विहान हैं । १० मुक्तिराओं को निरा।। 1।।
उन्होंने प्यार करने में असमर्थता प्रकट की। स्वामी आत्मानंद जी गृहस्थ से रंन्यासी बने थे। उनका
सत्यदेव नामक एक पागरूर में ही गगन का । गीत ।।। ।।।।। ।।।।
स्वामी आत्मानन्द का सामान संभाल लेने का शाह किया किन्तु कपरिप्रही सत्यदेव ने उ न ५४
कह कर लेने से इन्कार कर दिया कि स्वामी आत्मानन्द जी संन्याशी थे इसलिए उनके साथ मेरा फता पुत्र
सम्बन्ध नहीं था क्योंकि संन्यासी सर्वबन्धनों से मुक् होता है। इसलिए योगी के सामान पर गुरुकुल का ही
अधिकार है, मेरा नहीं। सभी व्यक्ति ब्रह्मचारी सत्यदेव के इस उदार विचार से प्रसन्न हुए। राती अनन्त
के स्वर्गवास से सहायक मुख्याप्तिात पदरित हो गया था किसी अंश में उसकी पृत्ति हेतु अपारी रात
तथा मधुरासिंह भक्त जी को सहायक मुख्याधिष्ठाता बना दिया गया।
। तत्पश्यात् सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि परलोक निवास स्थान आगान फोरमतरी
आत्मानन्द स्मारक पुस्तकालय स्थापित किया जाए जिसमें स्वामी आत्मानंद जी के प्रश्य तचा ब्रह्तचारी
सत्यदेव द्वारा संगीत ग्रन्थ भी रख दिये जाएं। जिस कमरे में रखा जी ने शरीर छोड़ा था तराका ताम
आत्मानन्द भवन लिख कर वहीं पर 'स्वामी आत्मानंद स्मारक पुस्तकालय' स्थापित कर दिखा जाए।
पुस्तकालय की कोई भी पुस्तक गुरुकुल से बाहर न आने पाए।

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