गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya)

गांधी जी की हत्या की जांच के लिए कपूर आयोग गठित हुआ।
जिसने गांधी हत्या में संघ को निर्दोष पाया।
0 फिर आरोप लगाया गया कि संघ गुप्त गतिविधियां संचालित
करता है। श्री गुरुजी ने बड़े स्पष्ट रूप से कहा कि संघ का काम खुले
मैदानों में चलता है, सबके सामने चलता है, किसी के आने जाने पर
कोई रोक-टोक नहीं है।
0 दुर्भाग्य से वोट–राजनीति के चलते सच्चाई को नकार कर संघ
के बारे में मुस्लिम विरोधी व साम्प्रदायिक जैसा दुष्प्रचार लगातार
किया जाता रहा और संघ विरोध मुस्लिम परस्त वोट–राजनीति का एक
प्रमुख हथियार बन गया। लेकिन संघ अपने राष्ट्रवाद व सेवा व्रत के बूते
इन सारे विरोधों के बीच और अधिक प्रखरता के साथ खड़ा हुआ है।
संघ ने भारत की हिन्दू चेतना को निरंतर ऊर्जावान किया है। यह
मुस्लिम या अन्य किसी मत-पंथ के विरुद्ध नहीं, अपितु राष्ट्रभक्ति
से ओत प्रोत हिन्दू मन गढ़कर भारत के विकास और उसे एक
स्वाभिमान सम्पन्न सशक्त राष्ट्र के रूप में विश्व में प्रतिष्ठित
करने के लिए किया है। 12 नवंबर 1996 चरखी दादरी (हरियाणा)
में अरब देशों के दो विमान जब आकाश में भिड़कर दुर्घटनाग्रस्त हो गए
तब उसमें 312 यात्री मारे गए। इसमें अधिकांश मुस्लिम यात्री थे। संघ
के स्वयंसेवकों ने बिना किसी भेदभाव के रात दिन एक कर राहत कार्य
चलाया जिसकी मुस्लिम जगत में भूरि-भूरि प्रशंसा हुई।
O जब राहुल गांधी संघ और सिमी को एक ही पलड़े में तोलते
हैं हंसी आती है कि राहुल गांधी को संघ तो छोड़िये, कांग्रेस और
अपने पूर्वजों का भी इतिहास पता नहीं। जो सिमी भारत में 'गजनी की
वापसी' के सपने देखता है, उसे संघ के समक्ष रखना राहुल गांधी का
देश की परिस्थितियों के प्रति ज्ञान ही दर्शाता है।
0 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने जो
देशभक्तिपूर्ण भूमिका निभाई, उससे प्रेरित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री
पं. नेहरू ने संघ के पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों को 26 जनवरी
1963 को राजपथ की परेड में शामिल होने का आग्रह किया। तब
3500 गणवेशधारी स्वयंसेवक संचलन करते हुए परेड में शामिल
हुए। इसी तरह 1965 में श्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रि
काल में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय दिल्ली की 2
व्यवस्था संघ के स्वयंसेवकों द्वारा संभालना आदि ऐसे अने
घटनाक्रम संघ की राष्ट्रभक्ति व समाज सेवा के प्रत्यक्ष उदाहरण
हिन्दू आतंकवाद जैसे छद्म शब्द गढ़कर संघ को उसे जोर
ओछी मानसिकता का परिचायक है। 'हिन्दू आतंकवाद' या 'भगवा आतंकवाद'
का नाम देना राजनीतिक चालबाजी के सिवाय और कुछ नहीं है। इसे दे
का जनमानस समझता है। उसे इस झूठ और भ्रम क जाल में नहीं फंसाया
जा सकता। संघ के प्रति हिन्दू समाज के विश्वास व सहयोग से यह स्पष्ट
है कि ऐसे षड्यंत्रों से रा.स्व.संघ का मार्ग अवरुद्ध नहीं किया जा सकता।
संघ मां भारती की सेवा में अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित व ढृढ़ संकल्पित
रहते हुए समाज के सहयोग से निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और राष्ट्र मंदिर के
भव्य निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका का निर्वहन करता रहेगा।

रा. स्व. संघ के सरकार्यवाह
मा. श्री सुरेश (भैय्याजी) जोशी जी का वक्तव्य
पूरे देश के कुछ स्थानों पर घटित विस्फोटों के संदर्भ में एटीएस
द्वारा कुछ अंकित व्यक्तियों की गिरफ्तारी की जानकारी समाचार पत्र |
में आई है। इन घटनाओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर भ्रम |
फैलाने का प्रयास भी समाचार पत्रों के माध्यम से किया जा रहा है
जिसकी संघ घोर निंदा करता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सदैव संवैधानिक मार्ग पर ही विश्वास
रखता है। गैर-कानूनी एवं हिंसात्मक गतिविधियों को न संघ का
समर्थन रहेगा, न ही संरक्षण।
जांच की निष्पक्षता पर विश्वास रखते हुए संघ के संबंधित
|के पदाधिकारियों ने आरोपित व्यक्ति को तत्काल सभी दायित्वों स’
|करने की घोषणा भी की है। आरोपी व्यक्तियों को उचित छातन बीन कर।
प्रताड़ित न किया जाये।
||उन पर कानूनी कार्रवाई अवश्य हो लेकिन निरपराध व्यक्तियों को।

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