गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), part4

गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), 
Part4

गायत्री मन्त्र ही है । सामवेद के १३।३।३ उत्तरांचल में और यजुर्वेद
है दो-तीन स्थानों में गुरु मंत्र का प्रदेश है । ३।३५, ३०।२२ और ३६।३
पर अथर्ववेद में तो यह सारा रहस्य ही खोल दिया है कि यह वेद
माता, गायत्री-माता, द्विजों को पवित्र करनेवाली, आयु, स्वास्थ्य,
सन्तान, पशुधन, ऐश्वर्य, ब्रह्मवर्चस देने वाली और प्रभु दर्शन करने-
वाली है । छान्दोग्योपनिषद् ने भी इसकी महिमा का गायन किया है
बादरायण के ब्रह्मसूत्र १1१।२५ पर शारीरिक भाष्य में श्री
शंकराचार्य जी ने लिखा है, "गायत्री मन्त्र के जप से ब्रह्म की प्राप्ति
होती है।
। भगवान मनु ने यह आदेश दिया है "तीन वर्ष तक साधनों के
साथ गायत्री का जप करते रहने से जप-कत्ता को परब्रह्म की प्राप्ति
होती है ।'
योऽधीतेऽहन्यहन्येतांस्त्रीणि वर्षाण्यतन्द्रितः ।।
स ब्रह्म परमभ्येति वायभतः खमतिमान् ।। मनु० २। ८२ ॥
इसी प्रकार महाभारत के भीष्मपर्व ४।३८ में और मनुस्मृति के
* अध्याय के अन्य श्लोकों में भी गायत्री-मंत्र की महानता प्रकट
की गई है।
महर्षि व्यास का कथन है, ''पुषपों- का सार मधु है, दूध का सार
और चारों वेदों का सार गायत्री है। गंगा शरीर के मल घो
और गायत्री-गंगा आत्मा को पवित्र कर देती है ।'
अत्रि ऋषि का यह कथन बड़ा मार्मिक है-'गायत्री प्रतिमा का

'

मि शोधन करनेवाली है ।'
, महर्षि स्वामी दयानन्द जी महाराज ने सत्यार्थ प्रकाश' के तृतीय
की । पमुल्लास में मनु भगवान का एक श्लोक देकर यह प्रादेश किया है-
ररित होते नित्य-कर्म को करता ।हुआ सावित्री अरथत् गायत्री मन्त्र
एजपाल में अर्थात एकान्त देश में जा, सावधान होकर जल के समीप
, अर्थ-शान और उसके अनुसार अपने चाल-चलन को करे,
परतु पह जप मन से करना उत्तम है ।''
इणक श्रषि ने 'चरक-संहिता' में यह कहा है कि जो ब्रहमचर्य-
सहित गायत्री की उपासना करता है और आंवले के ताज़ा (वृक्ष से
अभी-अभी तोड़े हुए) फलों के रस का सेवन करता है, वह दीर्घ-जीवी
होता है ।"
‘गायत्री-मंजरी' में तो गायत्री ही को सब-कुछ वर्णन कर दिया
गया है और लिखा है
भूलोकस्यास्य गायत्री कामधेनुर्मता बुधे: ।
लोक आश्रयणेनाम् सर्वमेवाधिगच्छति । २९ ।
| “विद्वानों ने गायत्री को भूलोक की कामधेनु माना है, संसार
इसका आश्रय लेकर सब-कुछ प्राप्त कर लेता है।"
श्री पं० मदनमोहन जी मालवीय कहा करते थे कि “गायत्री-मन्त्र
एक अनुपम रत्न है। गायत्री से बुद्धि पवित्र होती है और आत्मा में
ईश्वर का प्रकाश आता है। गायत्री में ईश्वर-परायणता का भाव उत्पन्न
करने की शक्ति है।'
माण्डले (बर्मा) जेल की काल-कोठरी में बैठकर गीता-रहस्य
लिखत बाल गंगाधर तिलक ने लिखा था-"गायत्री मन्त्र के
चला दे ।"
अन्दर यह भावना विद्यमान है कि वह कुमार्ग छडाकर सन्मार्ग पर
महात्मा गांधी तो गायत्री-मन्त्र के निरन्तर जप को रोगियों तथा
धार्मिक उन्नति चाहनेवालों के लिए बहुत उपयोगी बताया करते थे।
महर्षि स्वामी दयानन्द जी के जीवन में कई बार ऐसा हुआ
उन्होंने चित्त को एकाग्र तथा बुद्धि को निर्मल बनाने के लिए गा!
कि
मंत्र का जाप बताया । इतना बड़ा महत्व रखने वाला है ।
मन्त्र है।

त्रय सा गायत्री मंत्र के जाप का अधिकार

पातु कितनी बार भी बात है।
होते मग १ | यह पहने जाते हैं । ।। को गायत्री ॥
जप का घार न । पर ऐसा धन है, जिसका समाधा
घावश्यक है। वेद भगवान से लेकर पुराणों और रुमुतियों तका

Post a Comment

Please do not inter any spam link in the comment box

और नया पुराने