गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), Part3

गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), 
Part3
मंदिर निर्माण से राष्ट्र निर्माण की ओर

भारत की आत्मा श्री राम - भारत एक धर्म प्रधान देश है।
समय-समय पर अनेक अवतारों ने यहां आकर इस देश और इसके
निवासियों को ही नहीं, तो स्वयं को भी धन्य किया है। ऐसे ही एक
महामानव थे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम। महर्षि वाल्मीकि ने सर्वप्रथम
श्री राम कथा का उपहार हमें दिया। इसके बाद दुनिया की प्राय: सभी प्रमुख
भाषाओं में श्री राम की महिमा लिखी गयी है। संविधान के तीसरे अध्याय
में, जहां मौलिक अधिकारों का उल्लेख है, सबसे ऊपर श्री राम, सीता एवं
लक्ष्मण के चित्र बने हैं। इससे स्पष्ट है कि श्री राम भारत की आत्मा हैं।
अयोध्या प्रकरण पर न्यायालय का निर्णय - यों तो अयोध्या
में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए हिन्दुओं द्वारा तब से संघर्ष जारी है,
जब 1528 ई0 में उसे तोड़ा गया था, पर स्वराज्य प्राप्ति के बाद यह
विवाद न्यायालय में चला गया। गत 30 सितम्बर, 2010 को इलाहाबाद
उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने संविधान में मान्य हिन्दू कानून तथा
पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर बहुत महत्व का निर्णय दिया है। इसमें
सुनी बोर्ड के दावे को पूरी तरह निरस्त कर तीनों न्यायाधीशों ने एकमत
से माना है कि -
0 यह स्थान है श्री राम जन्मभूमि है।
01528 में बाबरी ढांचे से पूर्व वहां एक गैर इस्लामिक (हिन्दू) मंदिर था।
एक न्यायाधीश ने तीनों गुम्बद (लगभग 1500 वर्ग गज) वाला
पूरा स्थान हिन्दुओं को, जबकि शेष दो ने 1/3 भाग मुसलमानों को भी
देने को कहा है। यह विभाजन अव्यावहारिक, अनुचित और असंभव है।
अत: पूरा स्थान हिन्दुओं को मिलना चाहिए। अयोध्या में कई मस्जिदें
हैं, पर श्रीराम जन्मभूमि पूरे विश्व में केवल यही है। पूरा स्थान
मिलने से ही जन-जन की आकांक्षा और प्रभु श्रीराम की प्रतिष्ठा के
अनुरूप भव्य मंदिर बन सकेगा।
इतिहास में अयोध्या - त्रेता युग में श्रीराम का जन्म परम पावन
सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या में हुआ। अयोध्या को लाखों साल
से मोक्ष प्रदान करने वाली नगरी माना जाता है। यह आदिकाल से करोड़ों
भारतवासियों की मान्यता है।
अयोध्या मथुरा माया, काशी कान्चि अवन्तिका
पुरी द्वारावती चैव, सप्तैता मोक्षदायिका:॥
अयोध्या सदा से भारत के सभी मत-पंथों के लिए पूज्य रही है। यहां
जैन मत के पांच तीर्थंकरों का जन्म हुआ। भगवान बुद्ध ने यहां तपस्या की।
गुरु नानक, गुरु तेगबहादुर एवं गुरु गोविंद सिंह जी भी यहां पधारे। दुनिया
भर के इतिहासकारों और विदेशी यात्रियों की पुस्तकों के हजारों पृष्ठ
अयोध्या की महिमा से भरे हैं। विश्व में प्रकाशित सभी प्रमुख मानचित्र
पुस्तकों (एटलस) में अयोध्या को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

जन्मभूमि का इतिहास

इस्लाम का उदय और मंदिर पर आक्रमण 712 ई0 से
मुस्लिम नेताओं के आक्रमण शान्त और सम्पन्न भारत पर होने लगे।
1526 ई0 में बाबर भारत और 1528 ई0 में अयोध्या आया। उसके
आदेश पर उसके सेनापति मीरबाकी ने श्री राम मंदिर पर आक्रमण
किया। 15 दिन के घमासान युद्ध में मीरबाकी ने तोप के गोलों से मंदिर
गिरा दिया। इस युद्ध में 1.74 लाख हिन्दू वीर बलिदान हुए। फिर उसने
दरवेश मूसा आशिकान के निर्देश पर उसी मलबे से एक मस्जिद जैसा
ढांचा बनवा दिया। चूंकि यह काम हड़बड़ी और हिन्दुओं के लगातार
आक्रमणों के बीच हो रहा था, इसलिए उसमें मस्जिद की अनिवार्य
आवश्यकता मीनार तथा नमाज से पूर्व हाथ-पांव धोने (वजू) के
लिए जल का स्थान नहीं बन सका।
मंदिर-प्राप्ति के प्रयत्न इस घटना के बाद मंदिर की प्राप्ति हेतु
संघर्ष का क्रम चल पड़ा। 1528 से 1949 ई0 तक हुए 76 संघर्षों का
विवरण इतिहास में मिलता है। राजा से लेकर साधु-संन्यासी और
सामान्य जनता ने इन युद्धों में भाग लिया। पुरुष ही नहीं, स्त्रियों ने भी
प्राणाहुति दी। इस बीच कुछ मध्यस्थों के प्रयास से वहां बने 'राम चबूतरे
पर हिन्दू पूजा करने लगे। लोग ढांचे वाले उस परिसर की परिक्रमा भी
करते थे। अंग्रेजी शासन में अंतिम बड़ा संघर्ष 1934 में बैरागियों द्वारा

किया गया। उसके बाद वहां फिर कभी नमाज नहीं पढ़ी गयी।

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