गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), part2

गांधी जी की हत्या(Gandhi ki hatya), 
Part2

कांग्रेस के युवा सांसद राहुल गांधी ने प्रतिबन्धित आतंकी संगठन सिमी की
तलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से करके पूरी तरह राजनीतिक अपरिपक्वता और
नासमझी का सबूत दिया है। दोनों संगठनों की तुलना करना भारत की पहचान से
बेखबर होने के अलावा और कुछ नहीं है। मैंने संघ को बड़े करीब से देखा और
समझा है। मैं संघ को उस समय से जानता हूँ जब राहुल गांधी शायद पैदा भी
नहीं हुए होंगे। पत्रकार का धर्म हकीकत को सबके समक्ष सच्चाई और बिना
किसी द्वेष के पेश करना होता है। संघ निश्चित रूप से हिन्दू राष्ट्रवाद का प्रवर्तक
है और हिन्दू संस्कृति को भारतीय संस्कृति के पर्याय के रूप में देखता है मगर
इसकी राष्ट्रभक्ति पर संदेह करना रात को दिन बताने की तरह है। जरा सोचिये
आजादी से पहले जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने वर्धा आश्रम के सामने ही
लगे संघ के शिविर में गये थे तो उन्हें स्वयंसेवकों की अनुशासन प्रियता और
जाति-पाति के बन्धन से दूर देख कर कहना पड़ा था कि यदि कांग्रेस के पास
ऐसे अनुशासित कार्यकर्ता हों तो आजादी का आन्दोलन अंग्रेजों को देश छोड़ने के
लिए बहुत जल्दी मजबूर कर देगा। इतना ही नहीं महान समाजवादी चिन्तक और
जन नेता डा. राम मनोहर लोहिया ने भी संघ के बारे में कहा था कि यदि मेरे
पास संघ जैसा संगठन हो तो मैं पूरे देश में पांच साल के भीतर ही समाजवादी
समाज की स्थापना कर सकता हूँ। संघ ऐसा संगठन है जिसकी प्रशंसा स्वयं
पं. जवाहर लाल नेहरू ने भी की थी।
1962 के भारत-चीन युद्ध समय संघ के कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार
भारत की सेनाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए खुद पूरे देश में आगे बढ़ कर
नागरिक क्षेत्रों में मोर्चा संभाला था उसे देख कर स्वयं पं. नेहरू को इस संगठन
की राष्ट्रभक्ति की प्रशंसा करनी पड़ी थी और उसके बाद 26 जनवरी की परेड
में संघ के गणवेशधारी स्वयंसेवकों को शामिल किया गया था। 1965 के भारत
पाक युद्ध के समय भी संघ के स्वयंसेवकों ने पूरे देश में आंतरिक सुरक्षा बनाये
रखने में पुलिस प्रशासन की पूरी मदद की थी और छोटे से लेकर बड़े शहरों
तक में इसके गणवेशधारी कार्यकर्ता नागरिकों को पाकिस्तान हमले के समय
सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया करते थे। इनकी जुबान पर हमेशा भारत माता की जय
का उद्घोष रहता है। भारत में हिन्दू संस्कृति की बात करना क्या गुनाह है?
संघ पर महात्मा गांधी की हत्या के बाद प्रतिबन्ध जरूर लगाया गया था मगर
बापू की हत्या में संघ के किसी कार्यकर्ता का हाथ नहीं पाया गया । हिन्द
महासभा के नेता स्व. वीर विनायक दामोदर सावरकर को भी इस हत्याकांड में
गिरफ्तार किया गया था अगर उनकी राष्ट्रभक्ति पर भी क्या कोई कांग्रेसी प्रश्न
चिन्ह लगा सकता है? सावरकर के गुरु बंगाल के क्रांतिकारी श्याम जी कुण
वर्मा थे। संघ और हिन्दू महासभा की विचारधारा में भी मूलभूत अन्तर शुरू से
ही रहा है। हिन्दू महासभा राजनीति का हिन्दूकरण और हिन्दुओं के
सैनिकीकरण के पक्ष में थी जबकि संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम
हेडगेवार का लक्ष्य हिन्दुओं को मजबूत सांस्कृतिक संगठन स्थापित करना था।
इस सच को कैसे झुठलाया जा सकता है कि 1947 में भारत का बंटवारा होने
के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने पश्चिमी पाकिस्तान (पंजाब) के मोर्च पर
हिन्दुओं की रक्षा की थी।
मैं फिलहाल राजनीतिक सोच की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि संघ की
व्यावहारिक कार्यप्रणाली की बात कर रहा हूँ। संघ भारतीय संस्कृति का विश्वविद्यालय
है। यह जिस हिन्दू गौरव की बात करता है उसका मतलब मुस्लिम विरोध नहीं है
बल्कि मुस्लिम पहचान को भारत की जड़ों में खोजना है। संघ शुरू से ही कहता
रहा है कि भारत के मुस्लिम मूल रूप से भारतीय हैं और इनके परखों और हमारे
पैरों में कोई भेद नहीं है। धर्म बदलने का अर्थ राष्ट्रीय चिन्तन को प्रभावित करने
की कोशिश की जाती है तो वहीं आपत्ति होती है। इसलिए राहुल गांधी को पहले
भारत का सच जानना चाहिए और फिर कोई टिप्पणी करनी चाहिए। राहुल
गांधी का महत्व इसलिए नहीं है कि वह एक सांसद है बल्कि इसलिए है कि
वह नेहरू गांधी परिवार के वारिस हैं। भारत की नई पीढी युवा नागरिकों को उनके
सुन्दर चेहरे या विरासत से कोई खास लेना-देना नहीं है बल्कि उनकी योग्यता से
लेना देना है। उन्हें पहले यह योग्यता हासिल करनी होगी।
राहुल गांधी पहले यह जानकारी प्राप्त करें कि महात्मा गांधी क्यों
पाकिस्तान बनने के खिलाफ थे? वह कांग्रेस पार्टी के उन खिदमतगार ‘चमचों
से बचें जो उनके प्रधानमंत्री बनने के नारे बड़े ही प्रायोजित ढंग से लगवाते
हैं या भगवा आतंक की बात कह कर मुस्लिम मतदाताओं को रिझाना चाहते
हैं। ध्यान रखा जाए सबसे पहले ऐसे ही लोग चूहों की तरह जहाज छोड़ कर
उसी तरह भागते हैं जैसे 1977 में स्व. इन्दिरा गांधी का साथ छोड़ने वालों में
सबसे आगे वही थे जिनका डंका इमरजेंसी में बजता था।
अश्वनी कुमार, सम्पादक पंजाब केसरी

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