सहमति की शक्ति(shamati ki sakti), part2

सहमति की शक्ति(shamati ki sakti), 
Part2
आसमान पर बादल घिरे और कुछ बंदे और ही थीं कि आपके मन में
विचार आया, आज बारिश नहीं होनी चाहिए थी, कल होती तो अच्छा होता।
इस तरह आपने यह अच्छा नहीं हुआ की महर इस घटना पर लगा दी। जब
आपके जीवन में सहमति की शक्ति कार्य करने लगेगी तब आप समझ के साथ
कह पाएंगे, बड़ी कृपा है कि आज बारिश हो रही है, क्योंकि आज इसकी जात
है। अगर आज ज़रूरत नहीं होती तो यह आज नहीं आती।

ईश्वर की उपस्थिति में हो रही घटनाओं पर जब इंसान असहमत दिखाता है
तो तुरंत ही उसके मन में दु:ख की भावना उठती है। यह भावना आपकी असहमति
का संकेत है। दु:ख का संकेत मिलते ही आपको तुरंत स्वयं से कहना चाहिए कि
जो चल रहा है, वह सर्वोत्तम है। ऐसा ही होना चाहिए था।' ऐसा कहने भर से
ईश्वर द्वारा आपको दिया गया लिफ़ाफा तुरंत खुल जाता है। यानी ईश्वर की कृपा
आप तक पहुँचने लगती है । इसान के हृदय में जब तक सकारात्मक भाव नहीं
उठते तब तक उसे जवाब नहीं मिलते । इंसान हर घटना के घटित होने का कारण

जानना चाहता है, जिसे बंद होकर नहीं जाना जा सकता। उसके लिए इंसान का
खुलना आवश्यक है। ऐसा न होने पर उसके भीतर प्रतिरोध और दु:ख की भावना
जाग्रत होती है।

जीवन की हर घटना में चाहे सुख हो या दु:ख, ईश्वर आपके साथ ही होता
है। अत: असहमति का सवाल ही पैदा नहीं होता मगर इंसान अज्ञानवश ईश्वर से
असहमत हो जाता है।

कुदरत के श्रवण को सुनें : अगर आपके मन में यह शिकायत उठे कि
सत्य का श्रवण नहीं हो पा रहा है तो तुरंत ईश्वर से माफ़ी माँगे । दरअसल, कुदरत
आपको लगातार श्रवण दे ही रही है मगर आप उसे समझ नहीं पाते क्योंकि आप
शिकायत में खो जाते हैं।

इस पुस्तक द्वारा आपको शब्दों के रूप में समझ प्राप्त हो रही है मगर बाकी
जहां पर आपको कुदरत के संकेतों को पकड़कर खुद मनन करना होगा। आपके
स-पास जो भी लोग आपको मार्गदर्शन दे रहे हैं, उसे आप श्रवण के रूप में
आस-पास के लोगों द्वारा गुरुतत्त्व आपको संकेत करता है कि आपको
जीवन के किस विभाग में प्रगति की आवश्यकता है, आप किस चीज़ से पलायन
क रहे हैं, किन परिस्थितियों में आपके अंदर शिकायत उठती है... आदि। अपने
चारों ओर होनेवाली घटनाओं को अब बनाना भी एक कला है।

शिकायत मुक्त हमें : अपने जीवन में देखो कि आप को कहा कि
करते हैं? सहमति की शक्ति द्वारा पुरानी सारी शिकायतों को विलीन कले।
शिकायत रहित होने के बाद आप देखेंगे कि आपको हर शिकायत का जवाब
मिलने लगा है। हर जवाब अपने समय पर आता ही है। हर शिकायत पर जब
सहमति की शक्ति का उपयोग करेंगे तो उसके परिणाम देखकर आपको आंद
होगा। जीवन के बड़े से बड़े दु:ख पर भी जब आप सहमति दशति हैं तो
दु:ख विलीन हो जाता है। सहमति की शक्ति आपके जीवन में दु:खों की सफ
का काम करती है और यह ईश्वर की उपस्थिति में होता है। इसलिए दुख ३
'गेट आऊट' कहने की आवश्यकता नहीं है, वह अपने आप विलीन होगा। इस
आपके भीतर शांति भी बनी रहेगी और आपकी भावनाएँ भी सकारात्मक रहेगी।
यह सब करके देखने के बाद आपको सहमति की शक्ति का महत्व पता चलेगा।

ईशमत और गुजरात से सहमत हो : विश्व में लोग जिन बातों पर सहमन्
हो चुके हैं, उस पर पूरी दुनिया सहमत होकर काम करती है। दुनिया के हो
लोगों ने अगर इस बात पर सहमति दर्शाई कि चाँदी की कीमत सोने से ज्यादा है।
तो लोग चाँदी को अधिक महत्व देना शुरू करेंगे । कभी पूरी दुनिया कौड़ियों से
व्यापार करती थी, फिर लोग सहमत हुए कि अब कागज से कारोबार होगा। ज
पूरी दुनिया कागज़ के नोटों के पीछे भागती है। छपे हुए कागज की कोई कीमत
नहीं लेकिन जब उस पर सरकार अपनी सहमति देती है तो वह करेंसी नोट बन
जाता है। यह है सहमति की शक्ति । इस शक्ति द्वारा अपने जीवन के कोरे कागज़
को भी करेंसी नोट बनाएँ।

अब तक आप लोकमत और किस्मत के पीछे भागते रहे, अब आपको
अपना स्तर उठाते हुए ईशमत व गुजरात से सहमत होना है। पहले इस पर सहमत
हो जाएँ कि ईश्वर की उपस्थिति में घटनाएँ घटती हैं तो अगला कदम आप
आसानी से उठा पाएंगे।

लिफाफे को खुला रखें : दुःखद विचारों के साथ इस तकनीक का उपयोग ।
करे। घटना में जब भी दु:ख आए तब स्वयं से पूछे कि यह द:खद विचार आने

से पहले या शिकायत उठने से पहले मेरी अवस्था (पूर्व अवस्था) कैसी थी?*
आपको यही जवाब मिलेगा कि जब तक विचार नहीं आया था या शिकायत

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